मणिपुर : भारत की मणि

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उत्तर-पूर्वी भारत के प्राकृतिक एवं मनोहारी दृश्यों को अपने में समेटे हुए मणियों का वास स्थल है। मणिपुर की राजधानी इम्फाल समुद्र स्तर से 790 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। इम्फाल के विशेष पर्यटन स्थल हैं : -


शहीद मीनार : शहीद मीनार इम्फाल शहर के बीचों बीच अदम्य वीरों की स्मृति में बनाई गई है। इन्होंने 1891 में ब्रितानियों से लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। मेइती एवं आदिवासी शहीदों की स्मृति में बीर तिकन्दरजीत पार्क में यह ऊंची मीनार बनवाई गयी है।


ईमा मार्केट : मणिपुर में ईमा 'मां' को कहा जाता है। यह महिलाओं के लिए महिलाओं द्वारा संचालित एक अद्वितीय बाजार है। सड़क के दोनों किनारों पर यहां लगभग 3000 या उससे अधिक दुकानें सजती हैं। सड़क के एक तरफ फल, सब्जियां मछलिया एवं गृहनिर्मित परचून की दुकानें हैं तो सड़क के दूसरी ओर अति सुंदर हैण्डलूम एवं घरों में प्रयुक्त होने वाले औजार की दुकानें होती हैं।


कांगला : कांगला 1891 तक मणिपुर की शक्ति का केन्द्रबिन्दु था। यह मणिपुर शासकों एवं उनके लोगों का अदम्य ऐतिहासिक स्थल है। कांगला का मणिपुर के लोगों के विचार एवं हृदय में एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहां का गोविंदा जी टेम्पल बाहर एवं अन्दर की खांई एवं अन्य अवशेष मणिपुर एवं यहां के समृद्ध कलात्मक सभ्यताओं के प्रमाण हैं।


श्री श्री गोविन्दा जी मंदिर : श्री गोविन्दा जी मंदिर पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्रबिन्दु है। यह मणिपुर के पूर्व महाराजाओं के राजमहल से सटा हुआ धार्मिक स्थल है। जुडवा पहाडियों एवं इसमें पक्के प्रांगण में एक बड़ी मण्डली हॉल बना है जिसमें उपदेश/पुजारी प्रवचन देते हैंउपदेशकों के ये प्रवचन सुनने को भक्तों का बड़ा समूह एकत्र होता है। गोविदा जी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण एवं उनकी प्रमिका राधा को समर्पित है। भूकम्प में यह मंदिर एवं यहां की मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई।


मणिपुर राज्य संग्रहालय : यह दिलचस्प संग्रहालय पोलो ग्राउण्ड के समीप स्थित है। इस संग्रहालय में मणिपुर की जनजातीय विरासत एवं पूर्व शासकों की तस्वीरों के संग्रहण का प्रदर्शन है। सामान्यत: इन दिलचस्प वस्तुओं में उनके वस्त्र, हथियार एवं गोलाबारूद, अवशेष तथा ऐतिहासिक दस्तावेज हैं।


वार सीमेट्री युद्ध समाधि स्थल : यह सीमेट्री द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मारे गए ब्रितानियों एवं भारतीय सैनिकों की स्मृति में कॉमनवेल्थ वार ग्रेव्ज़ कमीशन द्वारा बनवाई गई थी। यही कमीशन इन समाधिस्थलों का प्रबन्धन भी करता हैइन समाधियों पर छोटे पत्थरों पर कांस्य पट्टिका पर इन सैनिकों के अभिलेख का अंकन किया गया है।


मणिपुर प्राणिउद्यान : मणिपुर प्राणिउद्यान इम्फाल से 6 किलो मीटर दूर इरोइसेम्बा में है। संकटापन्न प्रजातियों को देखने के अलावा पर्यटको सींग वाले हिरणों (संगई) को देखने आते हैं। यह हिरन विश्व में बहुत कम पाया जाता है साथ ही संकटापन्न प्रजातियों में से एक है।


लूकोई पाट : यह छोटी सी झील विश्नुपुर में एन.एच. 150 पर टिड्डीम मार्ग पर अवस्थित हैइसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते है। नौकायन की सुविधाओं एवं सुन्दर दृश्यों से युक्त यह झील आगंतुकों को सम्मोहित कर लेती है।


खोंगमपट ऑर्किड आलय : केन्द्रीय ऑर्किडेरियम इम्फाल से 10 किलोमीटर दूर एनएच 39 पर स्थित है। यहां 200 एकड़ में विस्तृत ऑर्किड की लगभग 110 दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती है, इसमें दर्जनों स्थानीय प्रजातियां भी शामिल हैंऑर्किड के खिलने का समय मार्च-अप्रैल है।


सचिरू वॉटर फॉल : इम्फाल से 20 किलोमीटर दूर टिड्डिम मार्ग से सटा हुआ यह वाटर फॉल गिरिपद पर सदाबहार मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर तीन वाटर फाल स्थल हैं। यह पर्यटकों के लिए यह अभी हाल ही में खोला गया है।


लोकटक झील : इम्फाल से 48 किलोमीटर दूर अवस्थित लोकटक झील उत्तर-पूर्व क्षेत्र की सबसे बड़ा ताजे जल वाली झील है। इसे दुनिया के एकमात्र तैरती हुई झील भी कहा जाता है, क्योंकि यहां छोटे-छोटे भूखंड या द्वीप पानी में तैरते है। इन द्वीप को फुमदी के नाम से जाना जाता हैफुमदी का सबसे बड़ा भाग झील के दक्षिण पूर्व भाग में स्थित है। इस सबसे बड़े भाग में दुनिया के सबसे लंबा और एकमात्र तैरता आ पार्क भी है जिसका नाम ‘किबुल लामजाओ नेशनल पार्क' कहा जाता है।


चुरूचांदपुर : यह इम्फाल से 60 किमी. दूर टिड्डिम मार्ग पर अवस्थित है। यह साइट सीइंग एवं छुट्टियों का आनन्द उठाने हेतु प्रसिद्ध खूबसूरत स्थानों में से एक हैयह आदिवासी कस्बा है एवं जिला मुख्यालय भी है। यह कला एवं शिल्प उत्पाद का क्षेत्र है जो कि स्थानीय बाजार में उपलब्ध होते हैं। कुकी-चिन मिज़ो यहां की स्थानीय जनजातियां हैं।


उखरूल : यह राज्य का सर्वोच्च पर्वतीय स्थान है। यह इम्फाल के पूर्व में 83 किलोमीटर पर स्थित है। उखरूल कई बहादुर जनजातियों का विकसित केन्द्र बिन्दु है। उखरूल यहां की सिरोई पहाडी, सिरोई लिली के लिए भी विश्व विख्यात है। सिरोई लिली के खिलने का समय मई - जून है।


मणिपुर की राजधानी इम्फाल कई सारे पर्यटनीय स्थलों के लिए जानी जाती है। इसमें मुतुआ म्यूजियम, मोरे, तमेनलांग, सेनापति, जुको घाटी एवं खाँगजॉम वॉर मेमोरियल प्रमुख हैं। मणिपुर की सुंदरता एवं वहां के लोगों का मित्रवत व्यवहार पर्यटकों के लिए एक अनुकूल वातावरण की रचना करता है। इसलिए मणिपुर जरूर जाएं।