विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने शांति के संदेश के साथ गृह राज्य मंत्री से भेंट की


नई दिल्ली : विभिन्न धर्मों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की आड़ में हिंसक प्रदर्शन और सार्वजनिक अशांति फैलाने के समय सरकार के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए आज नई दिल्ली में गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी से भेंट की।प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के साथ एकजुटता व्यक्त की और सरकार की नीतियों में भरोसा जताया। प्रतिनिधिमंडल ने एक स्वर में दृढ़ता के साथ कहा कि सीएए विदेशियों से जुड़ा है और किसी भी भारतीय को, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, वर्ण अथवा नस्ल का हो, इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। धर्म और हिंसा के सिद्धांतों पर विशेष ध्यान देते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कानून को उन लोगों के लिए मानवीय आधार पर पारित किया गया है, जो उत्पीड़न के डर से तीन देशों से भाग कर  अपने दुख को कम करने और सुरक्षा के लिए भारत में पलायन कर गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आपसी स्वीकृति और सौहार्द की भूमि होने के नाते; इस बात को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा कि कोई प्रदर्शन एक ऐसे फैसले के खिलाफ हो, जिसका उद्देश्य बेदखल किए गए परिवारों के कष्टों को कम करना है। सदस्यों ने इस बात को दोहराया कि यह कानून पूरी तरह औचित्यपूर्ण और उद्देश्यों पर आधारित है।


प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का लचीलापन हमारे समूहवाद की ताकत, अहिंसा और आपसी स्वीकृति के हमारे सिद्धांतों में दृढ़ विश्वास तथा संविधान के सिद्धांतों का पालन करने में निहित है। उन्होंने इस तथ्य को दोहराया कि हम सभी भारतीयों के रूप में अपनी पहचान बताते हैं और इसने हमें एकजुट रखा है। यही वह भरोसा और विश्वास है जो हमें संकट के समय एकजुट और मजबूत रखता है, उन ताकतों से दूर रखता है जो हमें एकजुट और बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे खुद गुमराह करने वाले तत्वों से चौकस रहें, जिसक उद्देश्य आपसी सम्मान और स्वीकृति की हमारी नींव को अस्थिर करना है।  


धार्मिक सौहार्द और शांति के भाव के रूप में, प्रतिनिधिमंडल ने लोगों तक अहिंसा और धार्मिक सौहार्द के इस संदेश के साथ पहुंचने की कामना की। उन्होंने शांति और एकजुटता के संदेश के साथ केन्द्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से मिलने की भी इच्छा व्यक्त की। प्रतिनिधिमंडल में जैन आचार्य डॉ. लोकेश जी, मेडिटेशन गुरू स्वामी दीपांकर जी, मुफ्ती शमून कासमी जी, सरदार संत सिंह जी सहित विभिन्न धर्मों और सम्प्रदायों के प्रमुख धार्मिक गुरू और समाज सुधारकों के अलावा वीर चक्र पुरस्कार प्राप्त कर्नल टी.पी. त्यागी जी, विनीत कुमार जी और गौतम जी शामिल थे।